क्या यह संघर्षविराम स्थायी शांति की ओर कदम है?

क्या यह संघर्षविराम स्थायी शांति की ओर कदम है?



भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा कश्मीर विवाद एक बार फिर हिंसक संघर्ष में बदल गया। हालिया घटनाओं में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आतंकवाद का समर्थन करने और सैन्य कार्रवाई करने के आरोप लगाए। 

संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और तनाव अभी भी बरकरार हैं। सीमा पर रहने वाले नागरिकों के लिए यह स्थिति अत्यंत अस्थिर और खतरनाक है। 

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चाहिए कि वह इस संघर्षविराम को स्थायी शांति में बदलने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और विश्वास बहाली के प्रयासों को प्रोत्साहित करे। केवल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और पारस्परिक समझ से ही इस लंबे विवाद का समाधान संभव है। 

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